आज से 5-6 दिन पहले मेरे दिल को एक गहरा आघात पहुँचा था, जो अब तक मेरे दिल और दिमाग को घेरे हुए है। इसकी बहुत सारी वजहें बनी; आज के दौर के व्यस्त अभिभावक, तानाशाही शिक्षकों की क्रूरता, हमारी स्कूलिंग सिस्टम, समाज की संकीर्णतावादी सोच आदि। सबसे बड़ी वजह थी कि राँची के एक छठी कक्षा के लड़के ने आत्महत्या कर ली। उसकी उम्र महज 11- 12 साल की थी। अख़बार में छपी ख़बर के अनुसार वह डीएवी पुंदाग का छात्र था और अपने होमवर्क वाले डायरी न मिलने के कारण काफी निराश था। इसी डर के कारण उसने खुदकुशी कर ली। खुदकुशी की जो भी वजहें रही हो लेकिन इस घटना ने समाज में एक भय का माहौल जरूर बना दिया। क्या एक छोटा- सा बच्चा भी इस तरह के फैसले ले सकता है जिससे वो अपनी बहुमूल्य जिंदगी को ही गँवा बैठे? सवाल है कि इन सबके बीच माँ- बाप कहाँ है? इस बच्चे के अभिभावक ने बताया कि वो होमवर्क डायरी न मिलने से काफी डर गया था और रात में इसी डर के साथ वो अपने बिस्तर पर गया, फिर सुबह........। किसी व्यक्ति ने आत्महत्या का रास्ता क्यों चुना, इस प्रश्न का उत्तर खोज पाना तो कठिन रहा ही है, लेकिन जब एक छोटा- सा बच्चा इस तरह के कदम उठा...