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Showing posts from 2019

नफ़रत के कारोबारी!

नफ़रत का कारोबार अब टीवी चैनलों की ज़रूरत बन चुका है। ऐसा लगता है कि इसके बिना अब ये धंधा नहीं चल सकता है। क़रीब 8-9 पहले मैंने लिखा था कि एजेंडा सेटिंग थ्योरी किस तरीके से दर्शकों पर हावी है। उस वक़्त भी मैंने आज तक के कार्यक्रम 'दंगल' का एक महीने का विश्लेषण किया था। उसमें हर दो-तीन दिन में राम मंदिर पर बहस किया गया था। अब ज़रा आज तक, ज़ी न्यूज़ और एबीपी न्यूज़ की शाम के वक़्त बहसों का मुद्दा देखिए। हर दिन हिंदू, राम, कश्मीर, पाकिस्तान, मुसलमान, इमरान खान के आस पास ये एंकर भटकते रहते हैं। कुछ ख़ास और अधूरे तथ्यों को लेकर उसे तोड़ना-मरोड़ना लगा ही रहता है। सांप्रदायिकता फ़ैलाने के लिए तैयार माल बिना रुके बेचा जा रहा है। तीनों चैनलों की ये सभी तस्वीरें जुलाई महीने की हैं। सिर्फ़ इस 3 हफ़्ते में इन चटकदार विषयों पर इतनी बार बहस की गई है। अगर आप हर महीने का विश्लेषण करेंगे तो कमोबेश इन चैनलों पर यही स्थिति रहती है। इसी जुलाई महीने में पूरा देश अलग-अलग आपदाओं से जूझता रहा है लेकिन इनके लिए वो आम घटना रही। इसका नतीजा मैं यही निकाल पाता हूं कि अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ एजेंडा चलाकर ये लोग जन...

किसानों के साथ यह कैसा मज़ाक़?

देश में किसी के साथ अगर सबसे घटिया मज़ाक होता है तो वह किसानों के साथ होता है। खेती-किसानी की समस्या को हल करने के सवाल पर हर सरकार खुलेआम झूठ बोलते आई है। मौजूदा भाजपा सरकार उसी का एक एक्सटेंशन थी। हर रैली और जनसभा में प्रधानमंत्री से लेकर हर छुटभैया नेता किसानों का नाम लेना नहीं भूलता है, लेकिन किसान और किसानी है कि जस का तस। कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के समय में स्वामीनाथन आयोग बनाई गई। इसके बाद आयोग की सिफ़ारिशें धूल फांकती रही। चुनावी रैलियां किसानों के नाम पर गरमाती रही। मोदी जी आए तो वही मंत्र जपते हुए आगे बढ़े, हुआ कुछ नहीं। पिछले 2 सालों में सिर्फ़ दिल्ली में कई बार देश भर के किसान इकट्ठा हुए। किसानों की मांगें बहुत बुनियादी रही- फसलों का सही दाम (एमएसपी), कर्ज़माफ़ी। इस बीच किसान आत्महत्या करते रहे, मध्यप्रदेश में किसानों की गोली मारकर हत्या हुई, आंदोलन चलता रहा, महाराष्ट्र के किसान मंडी में 50 पैसे प्रति किलो प्याज बेचते रहे और इधर लोक कल्याण मार्ग में बैठा एक ' फ़कीर' आमदनी दुगुनी करने का सपना दिखाता रहा। अब उस सपने को चुनावी घोषणा पत्र (मेनिफ़ेस्टो...

जन्मदिन विशेष: इरोम की अंतहीन लड़ाई!

आज इरोम शर्मिला चानू का जन्मदिन है। इरोम की ज़िंदगी से क्या हमें कुछ मिल सकता है? क्या इरोम हार की निशानी है? क्या इरोम को एक विजेता के तौर पर देखा जाय? इरोम हमें इस दुनिया की निष्ठुर ताकतों के ख़िलाफ़ लड़ने का रास्ता बताती है लेकिन इसी इरोम को देखकर लगता है कि एक अच्छा-खासा लंबा संघर्ष किस तरह आसानी से दफ़्न हो सकता है। क्या ऐसी हार को भी लोकतंत्र की ख़ूबसूरती माना जाय? मार्च 2017 में मणिपुर के साथ उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और गोवा का भी चुनाव परिणाम आया था। एक तरफ़ यूपी में भगवा ताकत अपनी जीत का जश्न मनाकर एक दंगाई को सीएम बनाने की योजना बना रही थी, दूसरी तरफ़ मणिपुर में सरकारी अत्याचार (अफस्पा) के ख़िलाफ़ 16 सालों तक लगातार बिना खाए अकेले अनशन करने वाली इरोम शर्मिला को वहां की जनता धोखा दे चुकी थी। 'आयरन लेडी' महज़ 90 वोट पाकर इस लोकतंत्र में ठगी जा चुकी थी। दुर्भाग्य ये है कि अफस्पा मणिपुर में अब भी लागू है। सिर्फ़ मणिपुर में मानवाधिकार उल्लंघन के हज़ारों मामले हैं। जुलाई 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि मणिपुर के 1500 से अधिक मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों ...

सरकारी आंकड़े बताते हैं कि बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था 'बीमार' है

                               तस्वीर- HT बिहार सरकार ने अपने आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 के एक पन्ने पर लिखा है कि मानव विकास के सभी स्तरों पर किसी भी व्यक्ति की तीन अनिवार्य पसंद होती हैं- स्वस्थ और लंबी ज़िंदगी जीना, ज्ञान प्राप्त करना और अच्छे जीवन स्तर के लिए आवश्यक संसाधनों तक पहुंच होना। कुछ नया नहीं है, ये समाज में रह रहे लोगों के लिए मूलभूत बातें हैं। लंबी ज़िंदगी तो नहीं, लेकिन जितने दिन व्यक्ति जी रहा है उसे एक लोककल्याणकारी राज्य के ज़रिए अच्छी और मुफ़्त स्वास्थ्य सुविधा ज़रूर मिलनी चाहिए। 2 लाख करोड़ रुपये के बजट में सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र को 9,622 करोड़ रुपये (कुल बजट का 4.8 फ़ीसदी) दिए हैं, जो साल 2018-2019 में स्वास्थ्य के क्षेत्र में आवंटित किए गए रकम से 1,829 करोड़ अधिक हैं। बजट में राज्य के अंदर 11 नए मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा हुई है, जो केंद्र और राज्य के द्वारा मिलकर बनाया जाएगा। इसमें छपरा, पूर्णिया, समस्तीपुर, बेगूसराय, सीतामढ़ी, वैशाली, झंझारपुर, सीवान, बक्सर, भोजपुर और जमुई में कॉलेज...