शिक्षण संस्थानों पर हो रहे हमलों पर आवाज़ हमेशा उठती रहेगी। अभिव्यक्ति की आज़ादी को रोकने पर हर छात्र को खड़ा होना चाहिए। चाहे वह देश के किसी भी कोने में पढ़ रहा हो। किसी भी संस्थान में गुंडागर्दी को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है, चाहे वह एफटीआईआई और आईआईएमसी जैसी कम छात्रों वाली छोटी- सी जगह क्यों न हो। पिछले 2- 3 दिनों से जो दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज में हुआ, वह बहुत ही शर्मनाक है। जिस तरह की मारपीट छात्रों के द्वारा हुई, इससे लगता है कि यह एक सोची- समझी साजिश थी। क्योंकि पूरा मामला ही उमर खालिद के व्याख्यान को रोकने के बाद शुरू हुआ। आज जामिया के छात्रों के द्वारा विरोध- प्रदर्शन में शामिल होकर समझने की कोशिश किया। वहाँ रामजस कॉलेज की एक छात्रा ने कहा कि किस तरह लड़कियों को धमकाया और डराया जा रहा है। उन्हें रेप और एसिड अटैक तक की धमकी तथाकथित गुंडों के द्वारा दी गई है। मैं इन बातों की पुष्टि नहीं करता हूँ, लेकिन जिस तरह मारपीट के वीडियो सामने आए हैं उससे लगता है कि छात्र पढ़ने वाले तो नहीं हैं। वो कुछ और ही करना चाहते हैं। सरकार और दिल्ली पुलिस को आरोपियों पर सही और सख़्त तरी...