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Showing posts from January, 2018

झारखंड का बजट, सरकार की नाकामी

झारखंड सरकार ने कल 2018-19 के लिए 80,200 करोड़ रुपये का बजट पेश किया, जो कि राज्य की आबादी और अर्थव्यवस्था के हिसाब से काफ़ी और बढ़िया है। यह राशि पिछली बार के बजट से स्पष्टत: ज़्यादा है। पिछले साल रघुबर जी ने 75 हज़ार करोड़ का बजट पेश किया था, जिसका मुश्किल से अब तक 40 फ़ीसदी भी खर्च नहीं हो पाया। रघु कह रहे हैं कि अगले तीन महीने में पूरी राशि ख़र्च हो जाएगी। भईया राज्य की जनता को शॉपिंग थोड़ी करवानी है जो ख़र्च हो जाएगी। बोलिए कि ये आपकी नाकामी है। आप अपनी मशीनरी को बेहतर बनाने में 3 साल बाद भी असफ़ल है। वैसे रघुबर जी भी '2022' तक झारखंड की समस्याएं ख़त्म करने की बात करते रहते हैं। 'आदिवासियों का विकास' जैसे जुमले भी आए हैं। जुमले इसलिए क्योंकि ज़मीन पर काम कीड़ों की तरह सड़ती रहती हैं। पिछले 17 साल से सब दे रहे हैं। सरकार ने हर क्षेत्र में बजट की राशि को कुछ प्रतिशत तक बढ़ाया है। शिक्षा में पिछले साल के मुकाबले 6.31% बढ़ाकर राशि 11,181 करोड़ हो गई। पूरे बजट का लगभग 13% (मोटामोटी) होगा, लेकिन सोचिए कि इतनी बड़ी राशि जाती कहां है। इतना ही समझिए कि बिहार की जो हालत है ठीक वही यहां के स...