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Showing posts from May, 2018

कॉरपोरेट और सरकार की चोरी, जनता से सीनाजोरी

वेदांता वही कंपनी है जिसने ओडिशा में यूनिवर्सिटी खोलने के नाम पर राज्य सरकार के साथ मिलकर चोरी छिपे क़रीब 6000 एकड़ ज़मीन हड़पने की कोशिश की थी। साल 2006 में बीजू जनता दल (बीजद) सरकार ने हर क़ानून को ताक पर रखकर 4000 एकड़ ज़मीन अधिग्रहण कर वेदांता फ़ाउंडेशन को दे भी दी थी। लोगों के कड़े विरोध के बाद उड़ीसा हाई कोर्ट ने ज़मीन अधिग्रहण पर रोक लगा दी थी। मामला अभी भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। यह ज़मीन पुरी-कोणार्क मरीन ड्राइव (ओडिशा तट) पर है जहां 1.82 मिलियन टन थोरियम युक्त मोनेजाइट का भंडार मिला था। इतनी ज़मीन में क़रीब 18 गांव आते हैं। 2004 और 2009 के चुनावों में वेदांता ने बीजद के लिए भरपूर पैसा लगाया था। इसलिए यूनिवर्सिटी के नाम पर अवैध तरीके से ज़मीन हड़प कर कारोबार को फलने-फूलने दिया जाना था। पिछले साल अक्टूबर महीने में ही वेदांता की इस प्रस्तावित यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष बिजय पटनायक ने इस्तीफा देते हुए कहा था कि यूनिवर्सिटी कोई इंडस्ट्री नहीं है। इसे किराए के मकान में भी शुरू किया जा सकता है। सही बात है, जेएनयू जैसी बड़ी यूनिवर्सिटी 1000 एकड़ के आस-पास में फैली हुई है। उसमें भी...