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Showing posts from November, 2016

सरकार की नीयत ही साफ़ नहीं...

  सच्चा है यहाँ कंगाल, तो बेईमान है मालामाल    ये पैसा बोलता है..... 'काला बाज़ार' फ़िल्म के इस पूरे गाने को सुनकर देश की स्थिति को अच्छी तरह से समझ सकते हैं। नोटबंदी की घोषणा हुए 20 दिन हो गए, इस बीच में तरह- तरह की और भी घोषनाएँ हुई जिसने आम लोगों को बैंकों और एटीएम के सामने लंबी क़तारों में लगाए रखा। सियासत तो होनी ही थी, भले ही विपक्ष के पास कोई पुख़्ता सुबूत न हो। उन्हें भी तो जनता के संवेदनाओं के साथ खड़ा रहना है, भले ही वो राजनीति के लिए हो। अब सरकार ने एक और घोषणा की है कि काले धन वाले 50% तक टैक्स देकर अपने पैसे सुरक्षित रख सकते हैं। यानि कि अगर आपके पास 100 करोड़ का काला धन है तो 50% टैक्स के रूप में चुका कर 50 करोड़ रूपये अपने पॉकेट में रख सकते हैं। लगता है कुछ भक्त लोग बच गए थे मोदी जी के घोषणा के पहले पैसे छुपाने में, ये स्कीम तो उन्हीं लोगों के लिए है। जनता को तो मूर्ख समझते ही हैं हमारे हुक़्मरान, इसलिए तो रो कर भी बात करना पड़ता है। ये 30 सितंबर वाली फिर स्कीम क्या थी? ये तो आप उन्हीं से पूछिए। क्या सरकार वाकई अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में लगी है या सिर्फ ...