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Showing posts from September, 2017

सावित्रीबाई फुले: देश की पहली महिला शिक्षिका या समाज की महानायिका?

ज़रा सोचिए, आज 21वीं सदी में समान शिक्षा देने में हमारा समाज जब असमंजस में जी रहा है, तो लगभग 200 साल पहले की हालत क्या होगी। शीर्षक में सावित्रीबाई फुले को देश की पहली महिला शिक्षिका या समाज की महानायिका होने पर प्रश्न चिह्न इसलिए, क्योंकि आज तक समाज के कुछ ठेकेदारों ने उस नाम को आम जनों के बीच प्रसिद्ध नहीं होने दिया। आप आज के सियासत का प्लैटफार्म माने जाने वाले ट्विटर के ट्रेंड को भी देखिए, तो शिक्षक दिवस डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन तक सिमटती नज़र आती है। शिक्षक दिवस को हम भले राधाकृष्णन के जन्मदिन के रूप में मना कर इसके दायरे को सीमित कर लें, लेकिन इतिहास में शिक्षकों और समाज उत्थान के संबंधों को विस्तार से देखना ज़रूरी है। वैसे तो इतिहास ने सावित्रीबाई को बहुत कम जगह दी है, लेकिन बहुजन के लिए वो एक महानायिका हैं। आख़िर शिक्षक दिवस के दिन सावित्रीबाई फुले को हम क्यों याद कर रहे हैं, उनका इतिहास हमारे आधुनिक समाज को जानना क्यों ज़रूरी है, इसके लिए 19वीं सदी की इस क्रांतिकारी महिला के बारे कुछ  ख़ास बातें  जाननी ज़रूरी है... 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के सतारा ज़िले के नायगांव...