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Showing posts from April, 2020

कोरोना: आपदा से ज़्यादा व्यवस्था की मार झेलता मज़दूर वर्ग

मज़दूरों के पलायन की तस्वीरों को देखकर आपको क्या लग रहा है? आगे आपको पढ़ाया जा सकता है कोरोनावायरस के कारण लॉकडाउन हुआ, जिससे मज़दूर वापस जाने लगे। पलायन कोरोनावायरस की वजह से नहीं हो रहा है, बल्कि इस पूंजीवादी व्यवस्था से हो रहा है। अगर कोरोना से पलायन होता, तो हम और आप क्यों नहीं पलायन कर रहे हैं? कुछ इसे देखकर 1947 के विभाजन से तुलना कर रहे हैं। वो एक अलग दर्द था, जो समय रहते धीरे-धीरे भरा या भर ही रहा है। तुलना करने की बजाय कोर मुद्दे को पकड़ने का वक़्त है। वो एक मुल्क का विभाजन था और ये सामाजिक विभाजन है जिसका ये भयावह रूप है। और ये वे लोग हैं, जिसके ऊपर हमेशा मार पड़ती है। ये समाज में मौजूद वर्ग संघर्ष की जीती जागती तस्वीर है। तस्वीरों को देखते हुए मुझे राजनीतिक अर्थशास्त्र समझ आने लगता है। अभी मैं पूंजीवादी व्यवस्था की खामियां गिनाने लगूंगा तो आप कहेंगे कि ये राजनीति का वक़्त नहीं है। लेकिन ये दर्द तो राजनीति की है। थोड़ा सोचिए, ये कैसी व्यवस्था है कि एक महीना काम नहीं मिलने पर लोग भूखे मरने लगेंगे, उनके पास कोई सोशल सिक्योरिटी नहीं है, वो शहर छोड़ने को सैकड़ों किलोमीटर पैदल च...