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Showing posts from January, 2017

फ़िल्म रिव्यू "मदारी"!

फ़िल्म 'मदारी' हमारे पूरे राजनीतिक और प्रशासनिक सिस्टम की शिथिलता को समझाने के लिए बनाई गई और मुझे लगता भी है कि ये फ़िल्म सिस्टम पर बहुत बड़ा तमाचा है। डायरेक्टर निशिकांत कामत ने पूरी कोशिश की है कि हम देश के अंदर व्याप्त भ्रष्टाचार, लालफीताशाही और नेताओं के स्वार्थ को आसानी से समझ सके। फ़िल्म दृश्यम के जैसे ही कामत साहब ने इसे भी थ्रिलर बनाने की कोशिश की है। उनकी ये कोशिश पूरी भी हुई है लेकिन जितनी आसानी से इसे फ़िल्माया गया है ऐसा वाकई में होता नहीं है। बहुत सारे सीन को देखकर दर्शकों को पहले से ही संकेत मिल जाते हैं। फ़िल्म की शुरुआत का एक डायलॉग- "बाज़ चूजे पर झपटा उठा ले गया, कहानी सच्ची लगती है, लेकिन अच्छी नहीं लगती। बाज़ पर पलटवार हुआ कहानी सच्ची नहीं लगती, लेकिन ख़ुदा क़सम बहुत अच्छी लगती है।" हमें बता देता है कि कहानी संघर्ष की है। फ़िल्म की पहली सीन में ही पता चल जाता है कि निर्मल (इरफान ख़ान) गृह मंत्री के बच्चे का अपहरण कर लेता है। उसके बाद के सीन में पूरी अफरा- तफरी को दिखाया जाता है, किस तरह नेता अपहरण के मुद्दे पर मीडिया, विपक्ष हर किसी को शांत करवाने में लग...