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Showing posts from August, 2020

मिड डे मील वर्कर्स की सैलरी क्या राष्ट्रीय शर्म की बात नहीं है?

                                      (फोटो: CPM) " नींद आएगी भला कैसे उसे शाम के बाद रोटियाँ भी न मयस्सर हों जिसे काम के बाद " क्या आपको पता है कि सरकारी स्कूलों में मिड डे मील (मध्याह्न भोजन) बनाने वाले वर्कर्स को कितनी सैलरी मिलती है? बिहार में सिर्फ़ 1,500 रुपये प्रति महीने, उसमें भी 10 महीने का ही भुगतान होता है। दक्षिण के राज्यों को छोड़ दें तो लगभग सभी राज्यों में इससे कुछ कम या ज़्यादा, लेकिन इतनी ही सैलरी है। तमिलनाडु में 6,000 और आंध्र प्रदेश में 3,000 रुपये। केरल में सबसे ज़्यादा प्रतिदिन और बच्चों की संख्या के हिसाब से 400-500 रुपये दिए जाते हैं। देश भर में क़रीब 30 लाख वर्कर मिड डे मील के काम में लगे हैं। अनुमान है कि इसमें 90 फ़ीसदी से अधिक महिलाएं ही हैं। बिहार में इन्हें रसोइया बुलाते हैं। राज्य में इनकी संख्या क़रीब 2.5 लाख है। पिछले साल जनवरी-फ़रवरी में क़रीब 40 दिनों के हड़ताल के बाद राज्य सरकार ने 250 रुपये बढ़ाकर 1,500 किया था। क्या ग़ज़ब का एहसान किया नीतीश कुमार ने! इसके अलावा इ...