मेरे प्यारे काॅलेज के दोस्तों,
याद कीजिए, साल 2013 के काॅलेज की शुरुआत कितने धूम धड़ाके से हुई थी। हर कोई एक- दूसरे को जानने के बाद खुशी से बहुत सारे वादे कर बैठता था। हर किसी के आँखों में उम्मीद की नई रोशनी थी। हर कोई एक अलग हुनर और प्रतिभा के साथ काॅलेज में दाखिला लिया था। हमलोग सभी पहली बार कैमरा, माइक और स्टूडियो का साथ पाकर झूम उठे थे, लगा था कि शरीर में दो हाथ के साथ दो पंख भी लग गए हैं। इन सब के साथ हर कोई दोस्ती की नई परिभाषा भी गढ रहे थे। काॅलेज की आवोहवा ने इसे गढने में पूरी मदद भी की। कैंटीन में दोस्तों के साथ चाय पीने और सिनेमा हाॅल से लेकर राँची के माॅल ने कभी मस्ती और दोस्ती में कमी नहीं होने दिया। पढ़ाई के साथ- साथ मौज- मस्ती भी जुड़ते चली गई और पहला साल अचानक कब खत्म हुआ, किसी को पता भी नहीं चला।
साल 2013 में हमारी संख्या 53 थीं, वहीं जेवियर्स के कड़े नियम ने हमें 37 में तब्दील कर दिया। उन सबको भी मैं बेहतर भविष्य की अग्रिम शुभकामनाएँ दे रहा हूँ जो हमारे साथ आगे नहीं आ पाए। इसी बीच हम सभी समूहों में बँटे और अपने- अपने स्तर से खुशियाँ मनाई। काॅलेज में बहुचर्चित डिपार्टमेंट होने के कारण हर किसी के बीच हम सब अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहे। टेस्ट मैच के दूसरे और तीसरे दिन की तरह हमारा दूसरा साल भी बीत ही गया। मनमुटाव, गुस्सा- गस्सी और हमारी बोली की चिंगारी तो पूरे साल जलती ही रही, लेकिन इसके बावजूद हम एक- दूसरे का साथ कभी नहीं छोड़े। उम्मीद है भविष्य में भो ऐसा न हो। बाॅयफ्रेंड और गर्लफ्रेंड वाली बात हमारे क्लास के अंदर नहीं बन पाई, बनता भी कैसे? सभी करियर को लेकर ज्यादा स्वच्छंद रहे। वैसे यह ठीक ही है कि हर कोई अपने विजन को लेकर साफ थेकुछ लोग तो अब फील्ड में उतर भी चुके हैं, यह मुझे काफी गौरवान्वित करता है। चाहता हूँ कि हर कोई तरक्की के सभी ऊँचाइयों को छू ले।
दूसरे साल में परिवर्तन आया कि सभी करियर के प्रति सजग हो गए, यह सही भी था क्योंकि बदलाव तरक्की को हवा देता है। ऐसे ही साल 2015(तीसरा साल) आया और अब हमारी संभावनाओं के दिन बनने लगे थे। कैमरे और माइक का साथ ज्यादा बढ गया और चुनौतियों का दौर शुरू हो गया था। पहले डाॅक्यूमेंट्री को लेकर चिंताएँ थी लेकिन हमलोगों ने अपने गंगटोक ट्रिप के आगे इसे छोटा कर दिया। इसमें कोई दोराय नहीं है कि हमलोगों ने ट्रिप में क्या खूब मस्ती की। इसकी यादें तो हम और आप जिंदगी भर याद रखेंगे। लेकिन अफसोस जरूर हुआ कि हमलोगों में किसी ने प्रभावी डाॅक्यूमेंट्री नहीं बनाई। तीनों सालों में हमारी एक सबसे बड़ी खूबी रही कि हमलोगों ने अपने प्रोजेक्ट को अंतिम डेट के बाद ही या एग्जाम के दिन साइन करवाया। एक बार मुस्कुरा जरूर देना! हांलाकि ये बहुत अच्छा लगा कि आप सभी इंटर्नशिप के दौर में अच्छे जगहों पर अच्छा काम करने में कामयाब रहे। इसे आगे भी बरकरार रखिएगा। जूनियर्स ने भी 25 अप्रैल को शानदार विदाई दी, जिसे कभी नहीं भुलाया जा सकेगा।
अब जब मैं दो दिन पहले (31 मई को) इन तीन सालों के इतिहास को अपने बही- खाते में दर्ज कर घर लौट रहा था तो लगा कि सेंट जेवियर्स और रांची बहुत सारी यादें दे रहा है, जिसे सहेज कर रखने की भी जरूरत है। दोस्ती की ऐसी इमारत बनीं कि शायद ही कभी टूट पाए। बस चाहता हूँ कि आप सभी अपने जीवन को नए तरीके से परिभाषित करें। और हाँ, गुजारिश करना चाहूँगा कि भविष्य में आप सभी अपने करियर को प्रोफेशन के साथ- साथ सामाजिक दायित्व समझकर भी निभाएँ। अंत में आप सबों का शुक्रिया अदा करना चाहूँगा कि आप सबों ने मेरे प्रतिभा और उपलब्धियों का भरपूर सम्मान किया और इन तीन सालों में क्या खूब प्यार और सहयोग दिया मुझे। मैंने इन तीन सालों को बहुत कम शब्दों में समेट दिया, इसके लिए क्षमा चाहता हूँ। अंत में एक बार फिर शुक्रिया इन तीन सालों में एक सुखद अहसास देने के लिए और आप सबों को जिंदगी की अग्रिम शुभकामनाएँ।
याद कीजिए, साल 2013 के काॅलेज की शुरुआत कितने धूम धड़ाके से हुई थी। हर कोई एक- दूसरे को जानने के बाद खुशी से बहुत सारे वादे कर बैठता था। हर किसी के आँखों में उम्मीद की नई रोशनी थी। हर कोई एक अलग हुनर और प्रतिभा के साथ काॅलेज में दाखिला लिया था। हमलोग सभी पहली बार कैमरा, माइक और स्टूडियो का साथ पाकर झूम उठे थे, लगा था कि शरीर में दो हाथ के साथ दो पंख भी लग गए हैं। इन सब के साथ हर कोई दोस्ती की नई परिभाषा भी गढ रहे थे। काॅलेज की आवोहवा ने इसे गढने में पूरी मदद भी की। कैंटीन में दोस्तों के साथ चाय पीने और सिनेमा हाॅल से लेकर राँची के माॅल ने कभी मस्ती और दोस्ती में कमी नहीं होने दिया। पढ़ाई के साथ- साथ मौज- मस्ती भी जुड़ते चली गई और पहला साल अचानक कब खत्म हुआ, किसी को पता भी नहीं चला।
साल 2013 में हमारी संख्या 53 थीं, वहीं जेवियर्स के कड़े नियम ने हमें 37 में तब्दील कर दिया। उन सबको भी मैं बेहतर भविष्य की अग्रिम शुभकामनाएँ दे रहा हूँ जो हमारे साथ आगे नहीं आ पाए। इसी बीच हम सभी समूहों में बँटे और अपने- अपने स्तर से खुशियाँ मनाई। काॅलेज में बहुचर्चित डिपार्टमेंट होने के कारण हर किसी के बीच हम सब अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहे। टेस्ट मैच के दूसरे और तीसरे दिन की तरह हमारा दूसरा साल भी बीत ही गया। मनमुटाव, गुस्सा- गस्सी और हमारी बोली की चिंगारी तो पूरे साल जलती ही रही, लेकिन इसके बावजूद हम एक- दूसरे का साथ कभी नहीं छोड़े। उम्मीद है भविष्य में भो ऐसा न हो। बाॅयफ्रेंड और गर्लफ्रेंड वाली बात हमारे क्लास के अंदर नहीं बन पाई, बनता भी कैसे? सभी करियर को लेकर ज्यादा स्वच्छंद रहे। वैसे यह ठीक ही है कि हर कोई अपने विजन को लेकर साफ थेकुछ लोग तो अब फील्ड में उतर भी चुके हैं, यह मुझे काफी गौरवान्वित करता है। चाहता हूँ कि हर कोई तरक्की के सभी ऊँचाइयों को छू ले।
दूसरे साल में परिवर्तन आया कि सभी करियर के प्रति सजग हो गए, यह सही भी था क्योंकि बदलाव तरक्की को हवा देता है। ऐसे ही साल 2015(तीसरा साल) आया और अब हमारी संभावनाओं के दिन बनने लगे थे। कैमरे और माइक का साथ ज्यादा बढ गया और चुनौतियों का दौर शुरू हो गया था। पहले डाॅक्यूमेंट्री को लेकर चिंताएँ थी लेकिन हमलोगों ने अपने गंगटोक ट्रिप के आगे इसे छोटा कर दिया। इसमें कोई दोराय नहीं है कि हमलोगों ने ट्रिप में क्या खूब मस्ती की। इसकी यादें तो हम और आप जिंदगी भर याद रखेंगे। लेकिन अफसोस जरूर हुआ कि हमलोगों में किसी ने प्रभावी डाॅक्यूमेंट्री नहीं बनाई। तीनों सालों में हमारी एक सबसे बड़ी खूबी रही कि हमलोगों ने अपने प्रोजेक्ट को अंतिम डेट के बाद ही या एग्जाम के दिन साइन करवाया। एक बार मुस्कुरा जरूर देना! हांलाकि ये बहुत अच्छा लगा कि आप सभी इंटर्नशिप के दौर में अच्छे जगहों पर अच्छा काम करने में कामयाब रहे। इसे आगे भी बरकरार रखिएगा। जूनियर्स ने भी 25 अप्रैल को शानदार विदाई दी, जिसे कभी नहीं भुलाया जा सकेगा।
अब जब मैं दो दिन पहले (31 मई को) इन तीन सालों के इतिहास को अपने बही- खाते में दर्ज कर घर लौट रहा था तो लगा कि सेंट जेवियर्स और रांची बहुत सारी यादें दे रहा है, जिसे सहेज कर रखने की भी जरूरत है। दोस्ती की ऐसी इमारत बनीं कि शायद ही कभी टूट पाए। बस चाहता हूँ कि आप सभी अपने जीवन को नए तरीके से परिभाषित करें। और हाँ, गुजारिश करना चाहूँगा कि भविष्य में आप सभी अपने करियर को प्रोफेशन के साथ- साथ सामाजिक दायित्व समझकर भी निभाएँ। अंत में आप सबों का शुक्रिया अदा करना चाहूँगा कि आप सबों ने मेरे प्रतिभा और उपलब्धियों का भरपूर सम्मान किया और इन तीन सालों में क्या खूब प्यार और सहयोग दिया मुझे। मैंने इन तीन सालों को बहुत कम शब्दों में समेट दिया, इसके लिए क्षमा चाहता हूँ। अंत में एक बार फिर शुक्रिया इन तीन सालों में एक सुखद अहसास देने के लिए और आप सबों को जिंदगी की अग्रिम शुभकामनाएँ।
Ek no.मानो जैसे बैठे बैठे तीन साल का सफर तय कर लिया हो। Thanks for this post Achor Saket Anand .....( कैसा लगा)
ReplyDeleteAchha hai bht achha hai
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